PM मोदी का बड़ा ऐलान, NEET पेपर लीक पर सख्त एक्शन! 4 राज्यों में बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट

Jul 23, 2026 - 21:15
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PM मोदी का बड़ा ऐलान, NEET पेपर लीक पर सख्त एक्शन! 4 राज्यों में बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट

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नई दिल्ली 
NEET पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार का एक्शन शुरू हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के ऐलान के बाद सरकार मिशन मोड में काम कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, अब NEET पेपर लीक मामले के आरोपियों पर सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा. इसी के साथ इन मामलों की सुनवाई के लिए चार राज्यों में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। 

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार संबंधित राज्य सरकारों और हाई कोर्ट से विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने का अनुरोध करेगी. इन अदालतों में NEET पेपर लीक से जुड़े मामलों की रोजाना सुनवाई होगी, ताकि जांच और ट्रायल में देरी न हो और जल्द फैसला आ सके। 

यह कानून 21 जून 2024 से पूरे देश में लागू है. इसका मकसद सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल, सॉल्वर गैंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दुरुपयोग और अन्य अनुचित तरीकों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है. कानून के तहत दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। 

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम में क्या-क्या?
यह अधिनियम संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), आईबीपीएस (IBPS), केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों की भर्ती परीक्षाओं के अलावा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित सभी प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं पर लागू होता है. चूंकि NEET का आयोजन भी NTA करती है, इसलिए इससे जुड़े पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों के मामलों में भी इसी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। 

NEET पेपर लीक मामले में दर्ज हैं FIR
सूत्रों के मुताबिक, NEET पेपर लीक मामले में इस कानून के तहत अब तक चार एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं. इन मामलों की सुनवाई के लिए बॉम्बे, कलकत्ता, दिल्ली और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. इनमें से दो मामले बॉम्बे हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। 

सरकार का मानना है कि विशेष अदालतों के गठन से न सिर्फ आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज होगी, बल्कि सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर भी मजबूत संदेश जाएगा. साथ ही भविष्य में पेपर लीक और संगठित नकल जैसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में भी मदद मिलेगी। 

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